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खिलाड़ी ने मान बढ़ाया

एनटीएचए के दो कैडेट्स ने बढ़ाया जमशेदपुर का गौरव

Khoboriya नवम्बर 27, 2025 0
तुषार की तस्वीर
तुषार की तस्वीर

जमशेदपुर : नवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) ने आज गर्व के साथ घोषणा की कि उसके दो प्रतिभाशाली कैडेट्स ने खेल के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन के बल पर प्रतिष्ठित केंद्रीय सरकारी पदों पर चयन प्राप्त किया है। यह उपलब्धि अकादमी की उस अनुशासनबद्ध खेल संस्कृति और प्रशिक्षण प्रणाली का परिणाम है, जो खिलाड़ियों को उत्कृष्टता और राष्ट्रीय योगदान के लिए तैयार करती है।एनटीएचए के खिलाड़ी अब्दुल कादिर को सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) में चयनित किया गया है। सीआईएसएफ देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक और राष्ट्रीय अवसंरचनाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अर्धसैनिक बल है। अब्दुल कादिर ने वर्षों के कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, अनुशासन और रणनीतिक सोच के माध्यम से अकादमी के मानकों को नई ऊंचाई दी है। उनके चयन ने यह सिद्ध किया है कि एनटीएचए का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा की भावना को भी पोषित करता है।

 

अनुशासन और समर्पण की मिसाल

एनटीएचए के ही तुषार परमार ने भारतीय सेना में भर्ती होकर अकादमी का मान बढ़ाया है। यह नियुक्ति उनके मजबूत मनोबल, अटूट धैर्य और प्रतियोगी दृष्टिकोण का परिणाम है। भारतीय सेना में चयन किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सम्मान और जिम्मेदारी का सर्वोच्च प्रतीक है। तुषार ने यह दिखाया है कि खेल में विकसित अनुशासन, एकाग्रता और नेतृत्व क्षमता जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का आधार बन सकती है।इन दोनों कैडेट्स की सफलता ने नवल टाटा हॉकी अकादमी की उस विचारधारा को पुनः स्पष्ट किया है, जिसमें खेल को जीवन परिवर्तक माध्यम माना जाता है। एनटीएचए का लक्ष्य केवल उत्कृष्ट हॉकी खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक गढ़ना है जो देश के प्रति निष्ठा, ईमानदारी और सेवा भावना से प्रेरित हों। यह उपलब्धि अन्य उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

 

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ठंड बढ़ने से झारखंड में मौसम हुआ सर्द

झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।   राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों।   मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।

“जंगल का तोहफा”: झारखंड की पारंपरिक औषधीय धरोहर

Adivasi food: झारखंड के रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में पाई जाने वाली यह परंपरा संथाल, हो, ओरांव और मुंडा जैसे आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी जीवनशैली का अहम हिस्सा रही है। जंगलों से गहरा रिश्ता रखने वाले ये समुदाय प्राकृतिक संसाधनों को भोजन और औषधि के रूप में उपयोग करते आए हैं। सर्दियों के मौसम में यह पारंपरिक खाद्य पदार्थ पारिवारिक भोज का विशेष हिस्सा बन जाता है और इसे प्यार से “जंगल का तोहफा” कहा जाता है। यह सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक भी है। ओडिशा में इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल चुका है, जिससे इसकी विशिष्टता और पारंपरिक महत्व को आधिकारिक मान्यता मिलती है। सेहत का प्राकृतिक कवच: ठंड से लेकर इम्युनिटी तक सर्दियों में इसका सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ठंड व सर्दी-जुकाम से बचाव में सहायक माना जाता है। यह भूख बढ़ाने में भी मदद करती है, जिससे शरीर को भरपूर पोषण मिलता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। इसके नियमित सेवन से हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पारंपरिक घरेलू औषधि के रूप में भी अपनाया जाता है, खासकर बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए। रोगों से लड़ने में सहायक और बढ़ती लोकप्रियता आदिवासी समाज में यह धारणा प्रचलित है कि यह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ कई तरह की बीमारियों में राहत पहुँचा सकता है। कोरोना, मलेरिया, पीलिया, बुखार, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और यहाँ तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में इसे सहायक माना जाता है। परंपरागत विश्वासों के अनुसार, चींटियों के काटने से होने वाले बुखार में भी यह लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, वजन बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में इसकी भूमिका बताई जाती है। आजकल शहरी क्षेत्रों में भी लोग इसे स्वास्थ्यवर्धक सुपरफूड के रूप में अपनाने लगे हैं, जिससे यह ग्रामीण और आदिवासी सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक पहचान बना रहा है।

झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2025 का भव्य आगाज, सांस्कृतिक रंगों संग सिनेमा का जश्न शुरू

FILM FESTIVAL: श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में सोमवार को झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव – 2025 (छठा संस्करण) का शुभारंभ बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। फ़िल्म और कला जगत से जुड़े अनेक गणमान्यों की उपस्थिति ने उद्घाटन समारोह को खास बना दिया। मुख्य अतिथि के रूप में आदित्यपुर नगर निगम की उपनगर आयुक्त परुल सिंह तथा सह मुख्य अतिथि के रूप में श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति सुखदेव महतो ने समारोह की शोभा बढ़ाई। विशिष्ट सम्मानित अतिथियों में डॉ. जे.एन. दास,डॉ ज्योति सिंह, पूरबी घोष, पवन कुमार साव, चंचल भाटिया, नेहा तिवार, ज्योति सेनापति, पूर्व वार्ड पार्षद नीतू शर्मा शामिल रहे।   समारोह की शुरुआत परिचय और स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके बाद सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुत आकर्षक स्वागत नृत्य ने मंच का माहौल जीवंत कर दिया। JNFF के संस्थापक संजय सतपथी और राजू मित्रा ने स्वागत भाषण में महोत्सव की यात्रा, उद्देश्य और झारखंड में फ़िल्म संस्कृति के विस्तार पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। सभी मान्यवरों ने अपने प्रेरक संबोधन से कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊँचाई दी।   मंचीय कार्यक्रम के दौरान लोकप्रिय शॉर्ट फ़िल्म “Silk Coffin” की विशेष स्क्रीनिंग की गई, जिसे दर्शकों ने विशेष प्रशंसा दी। महोत्सव को सफल बनाने में संस्थापकों के साथ-साथ क्रिएटिव डायरेक्टर शिवांगी सिंह,डॉ. शालिनी प्रसाद का रचनात्मक नेतृत्व अत्यंत प्रभावी रहा। झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव 08 से 13 दिसंबर तक आयोजित होगा। 09 से 12 दिसंबर तक विभिन्न श्रेणियों की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 13 दिसंबर को समापन एवं पुरस्कार समारोह (Award Night) XLRI, जमशेदपुर में होगा।

झारखंड आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान व अधिकारों के मुद्दें को लेकर घाटशिला में जुटेंगे

जमशेदपुर: राज्यभर के झारखंड आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर ‘झारखंड आंदोलनकारी सेनानी समन्वय आह्वान’ ने 22 नवंबर को बाबा तिलका माझी क्लब, फुलडुंगरी, घाटशिला में एक बैठक बुलाया गया है. आयोजन समिति के प्रो. श्याम मुर्मू, संतोष सोरेन, आदित्य प्रधान, सुराई बास्के व अजीत तिर्की ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्तमान सामाजिक सुरक्षा नीति सीमित होने के कारण हजारों आंदोलनकारी विशेषकर वे जो जेल नहीं गये थे, पर आंदोलन में उनका सक्रिय भूमिका रहा है. लेकिन वे आज भी पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित है. इस स्थिति में अब एक मजबूत संयुक्त मंच की आवश्यकता महसूस की जा रही है. ताकि आंदोलन मजबूती के साथ अपनी मांगों को सरकार के सामने रख सके. उन्होंने सभी आंदोलनकारियों से अपील किया है कि वे उक्त बैठक में आवश्यक रूप से भाग ले.   ये हैं प्रमुख मांगें -सभी आंदोलनकारियों को समान सामाजिक सुरक्षा एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाये -पेंशन में उचित वृद्धि तथा नियमित भुगतान किया जाये -आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान की जाये -आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दिया जाये -झारखंड आंदोलनकारी संग्रहालय सह स्मारक का निर्माण कराया जाये -झारखंड आंदोलनकारी आयोग का पुनर्गठन किया जाये

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव का हुआ समापन

जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में बुधवार को रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव का समापन हुआ. इस पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन शाम को नागपुरी, संताली और जनजातीय लोकगीतों की गूंज के साथ पूरा मैदान झूम उठा. देश के विभिन्न राज्यों से आये कलाकारों ने अपने लोक संगीत और नृत्य से जनजातीय संस्कृति की विविधता का परिचय कराया. नागपुरी गायक अर्जुन लकड़ा और गायिका गरिमा एक्का ने संवाद अखड़ा मंच को संभाला. जैसे ही अर्जुन लकड़ा संवाद अखड़ा मंच पर पहुंचे, युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गयी. दर्शकों ने उनकी पसंदीदा गीतों की फरमाइश शुरू कर दी. लकड़ा ने अपने ट्रेडिंग गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को जोश से भर दिया. उनका गायकी का अंदाज और स्टेज कवरिंग शैली दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी. इसके बाद संताली गायिका कल्पना हांसदा ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक व मॉडर्न गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया. उनके गीतों की धुन पर युवाओं ने मैदान में समूह बनाकर नृत्य किया. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं ने एक-दूसरे का हाथ थाम लोकनृत्य की लय पर झूमकर ट्राइबल संस्कृति की जीवंत छटा बिखेर दी. जनजातीय संगीत पर मंत्रमुग्ध हुए दर्शक कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और युवा उपस्थित थे. हर गीत, हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही. युवाओं ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर इस सांस्कृतिक माहौल को कैद किया. सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि मेघालय, सिक्किम, नागालैंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आये कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी. संवाद अखड़ा के मंच पर इन कलाकारों ने लोकनृत्य, पुनर्जीवित रिवाजों और जनजातीय संगीत के सुरों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम समापन की यह शाम सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बना. लौहनगरी जमशेदपुर की धरती पर कलाकारों ने एकता और कला के नये रंग भी बिखेरा. स्टॉलों से एक करोड़ से अधिकार का हुआ कारोबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल समेत कला और हस्तशिल्प व पारंपरिक उपचार के स्टॉल्स के कई स्टॉल भी लगाये थे. जहां शहर समेत कोल्हान के विभिन्न जगहों से आये लोगों ने जमकर खरीदारी भी की. टीएसएफ के रिपोर्ट के मुताबिक इसबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में एक करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ है. इससे यह बात साबित होती है कि जनजातीय समाज की वस्तुएं अब ब्रांड बन चुकी हैं. जिसे आदिवासी ही नहीं अन्य समाज व समुदाय के लोग भी खूब पसंद कर रहे हैं. संवाद फेलोशिप के लिए नौ फेलो का किया चयन टाटा स्टील फाउंडेशन ने संवाद फेलोशिप 2025 के लिए 9 फेलो के चयन की भी घोषणा की. इनका चयन 572 आवेदनों में से किया गया, जो 25 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 122 जनजातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. जिनमें विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों से 10 आवेदक शामिल थे. फाउंडेशन ने पिछली कई फेलोशिप परियोजनाओं के पूरा होने का भी जश्न मनाया.

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जमशेदपुर रन: ऊर्जा व उत्साह का संगम

टाटा स्टील ने आज टाटा स्टील जमशेदपुर रन का 10वाँ संस्करण आयोजित किया, जिसे जमशेदपुर हाफ मैराथन के नाम से ब्रांडेड किया गया, जिसने इस क्षेत्र में डिस्टेंस रनिंग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में शहर की स्थिति को मजबूत किया। अब अपने दूसरे वर्ष में, हाफ मैराथन श्रेणी को लोकप्रिय 10-किमी, 5-किमी और 2-किमी इवेंट्स के साथ आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न आयु समूहों और क्षमताओं के कुल 3,834 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 932 महिलाएँ और 2,902 पुरुष शामिल थे।   इस कार्यक्रम को टाटा स्टील के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर और प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन, रुचि नरेंद्रन, टाटा स्टील, कॉर्पोरेट सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट डी बी सुंदरा रामम, शैलजा रामम, टाटा स्टील, मेडिकल सर्विसेज की जेनरल मैनेजर डॉ. विनीता सिंह, टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक रितु राज सिन्हा, और टिनप्लेट के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज उज्ज्वल चक्रवर्ती, के साथ-साथ टाटा इकोसिस्टम के अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन लीडर्स ने 10वें संस्करण के प्रति मजबूत सामुदायिक प्रतिक्रिया की सराहना की और जमशेदपुर में स्वास्थ्य, समावेशन और नागरिक गौरव को बढ़ावा देने में खेल की भूमिका पर प्रकाश डाला।   इस वर्ष की दौड़ में सभी श्रेणियों में ज़ोरदार प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हाफ मैराथन (पुरुष) में, मोहित यादव 1:04:05 के समय के साथ विजेता बने, उसके बाद सचिन यादव 1:04:15 पर, रवि कुमार पाल 1:04:59 पर, शुभम सिंधु 1:05:18 पर, और धनंजय महतो 1:16:05 पर रहे। हाफ मैराथन (महिला) में, भारती नैन ने 1:16:38 के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया, उसके बाद रेनू सिंह 1:18:38 पर, अंजलि पाटीदार 1:21:03 पर, अनिता दास 1:27:27 पर, और गुड़िया कुमारी 1:37:08 पर रहीं।   10-किमी दौड़ में प्रभावशाली प्रदर्शन दर्ज किए गए, जिसमें पुरुष वर्ग में बलराम ने 30:06 के समय के साथ जीत हासिल की, उसके बाद नवरत्न (30:13), प्रशांत चौधरी (30:23), मोहन सांगवान (30:42) और चंदन यादव (32:12) रहे। महिला वर्ग में, ज्योति ने 36:16 के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, उसके बाद संगीता पाल (36:22), अनामिका देवी (39:14), पानो बास्के (42:45) और शोभा महतो (44:22) रहीं।   5-किमी दौड़ ने लगातार युवा और उभरते हुए धावकों को आकर्षित करना जारी रखा। पुरुष वर्ग में, अभिषेक ने 14:47 के समय के साथ चार्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया, उसके बाद बबलू टुडू (14:53), एस. प्रताप राव (15:28), शिव गुप्ता (16:09) और बगराई मुर्मू (16:14) रहे। महिला वर्ग में, मनाली सिंघा ने 18:55 के समय के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, उसके बाद मनीषा (20:56), दिलकी परैया (21:18), चाइना गोप (22:04) और लक्ष्मी मुर्मू (22:32) रहीं।   सभी श्रेणियों में, कुल भागीदारी मजबूत बनी रही, जिसमें 10 किमी में 1,398 धावक, 5 किमी में 957, 2 किमी फन रन में 1,047 और हाफ मैराथन में 432 धावक शामिल थे, जो शहर की बढ़ती हुई रनिंग संस्कृति को दर्शाता है। महिला भागीदारी एक प्रमुख फोकस क्षेत्र बनी रही, जिसमें सभी दूरियों पर उनकी मजबूत उपस्थिति दर्ज की गई।   2025 के संस्करण को टाटा कॉपर ने हाइड्रेशन पार्टनर के रूप में, टाटा ग्लूको+ ने एनर्जी पार्टनर के रूप में, जिंजर होटल्स ने हॉस्पिटैलिटी पार्टनर के रूप में और कोरु फाउंडेशन ने सस्टेनेबिलिटी पार्टनर के रूप में समर्थन दिया। कोरु फाउंडेशन और ऑपरेशनल टीमों के सहयोग से, आयोजकों ने सिंगल-यूज सामग्री को कम करके, पुन: उपयोग को प्रोत्साहित करके और पूरे आयोजन स्थल तथा मार्ग पर वेस्ट सेग्रीगेशन और रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करके लगभग ज़ीरो-वेस्ट दौड़ की दिशा में काम किया।   10 संस्करणों में, टाटा स्टील जमशेदपुर रन एक विशिष्ट सामुदायिक फिटनेस पहल के रूप में विकसित हुआ है जो कर्मचारियों, परिवारों, नागरिकों और एथलीटों को एक साझा मंच पर एक साथ लाता है। हाफ मैराथन श्रेणी के निरंतर विस्तार के साथ, टाटा स्टील स्वस्थ जीवन शैली को प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही जमशेदपुर को एक हरे-भरे, सक्रिय और समावेशी लौह नगरी के रूप में प्रदर्शित कर रही है।

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तुषार की तस्वीर

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