Live update news
पहचान की जंग: झारखंड में सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आंदोलन तेज

रांची: झारखंड में एक बार फिर 'सरना धर्म कोड' का मुद्दा गरमा गया है। आगामी जनगणना को देखते हुए आदिवासी संगठनों और स्थानीय समुदायों ने अपनी इस पुरानी मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। वहीं, राज्य की सियासत भी इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह से आमने-सामने आ गई है। क्यों तेज हुई मांग? झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में सरना धर्मावलंबियों के लिए एक अलग धार्मिक कोड (कॉलम) शामिल करने का पुरजोर आग्रह किया है। राज्य सरकार का तर्क है कि प्रकृति पूजक आदिवासियों की एक विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, जिसे जनगणना में 'अन्य' श्रेणी में रखने से उनकी सही आबादी का आकलन नहीं हो पाता। जमीनी स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। झारखंड के कई ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में "सरना कोड नहीं, तो जनगणना नहीं" के नारे बुलंद हो रहे हैं। आदिवासी पुरोहितों (पाहन) और ग्राम प्रधानों का कहना है कि वे मूर्ति पूजा या वर्ण व्यवस्था को नहीं मानते, बल्कि जल, जंगल और जमीन की पूजा करते हैं। इसलिए उन्हें किसी अन्य मुख्यधारा के धर्म के साथ जोड़ना उनकी संवैधानिक स्वतंत्रता का हनन है।

1 सप्ताह Ago
₹12 लाख के ग्रांट के साथ ट्राइबल स्टार्टअप्स को उड़ान देने की तैयारी, आवेदन 15 जून तक

ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2026: जनजातीय उद्यमिता को मिलेगा नया मंच भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय अब देश की जनजातीय प्रतिभाओं और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। Startup India के सहयोग से शुरू किया गया “Tribal Business Conclave 2026 – Open Grand Challenge” देशभर के innovators और startups को tribal communities की समस्याओं के समाधान के लिए आमंत्रित कर रहा है। इस initiative का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के लिए practical और technology-based solutions तैयार करना है। सरकार का मानना है कि innovation और entrepreneurship के माध्यम से tribal economy को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। हेल्थ, एजुकेशन और आजीविका पर रहेगा फोकस इस grand challenge को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: Tribal healthcare services को बेहतर बनाना Tribal students के लिए education और skill development solutions तैयार करना Tribal artisans, farmers और entrepreneurs की income बढ़ाने के लिए livelihood innovations विकसित करना सरकार विशेष रूप से ऐसे startups की तलाश में है जो remote tribal क्षेत्रों में scalable और sustainable मॉडल तैयार कर सकें। विजेताओं को मिलेंगे लाखों रुपये इस प्रतियोगिता में चयनित startups को कुल ₹12 लाख तक की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम पुरस्कार – ₹5 लाख द्वितीय पुरस्कार – ₹4 लाख तृतीय पुरस्कार – ₹3 लाख इसके अलावा mentorship, investor connect और national-level exposure जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू Challenge के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक startups Startup India portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। Tribal Economy को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार यह conclave “Vocal for Local” और “Atmanirbhar Bharat” अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे tribal products, handicrafts और local innovations को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। युवाओं के लिए बड़ा अवसर यह challenge विशेष रूप से उन युवाओं और startups के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है जो social impact और rural innovation के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस initiative से tribal communities के जीवन स्तर में सुधार आएगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

1 सप्ताह Ago
सीबीएसई: स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रति बढ़ाई जाएगी जागरूकता

Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध स्कूलों में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सोशल मीडिया अभियान चलाएगा। इस पर 30 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड ने एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राशि सामग्री निर्माण, प्रचार-प्रसार, डिजिटल विज्ञापन और अभियान प्रबंधन सहित सभी संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी। सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप व्यावसायिक-कौशल शिक्षा अनिवार्य किया है।इसके तहत कौशल शिक्षा और कौशल बोध गतिविधि पुस्तिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऑडियो-विजुअल सामग्री, लघु वीडियो, प्रशंसा पत्र, एनिमेशन तथा विभिन्न डिजिटल क्रिएटिव विकसित किए जाएंगे। बोर्ड की वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद इसे स्वीकृति देने की सिफारिश की। इसके पश्चात प्रबंध समिति ने वित्त समिति की सिफारिशों का अनुमोदन करते हुए एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी।  

3 महीने Ago
PREMSHILA HANSDAH:पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन, संताली सिनेमा जगत में शोक की लहर

PREMSHILA HANSDAH: संताली फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन हो गया है। उनके चले जाने से न केवल संताली सिनेमा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रेमशिला हांसदा अपनी मधुर और जादुई आवाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने कई लोकप्रिय संताली एलबमों और फिल्मों में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। अपनी अद्वितीय कला के दम पर उन्होंने झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य आदिवासी बहुल राज्यों में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। इतनी कम उम्र में उनके निधन ने प्रशंसकों और साथी कलाकारों को झकझोर कर रख दिया है।   सिने जगत के कलाकारों और उनके चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर और 'मरांगबुरू से प्रार्थना की है कि उनकी पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दें। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रेमशिला का जाना संताली संगीत के एक सुनहरे युग की अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले समय में नामुमकिन होगी। उनकी आवाज हमेशा उनके गीतों के माध्यम से जीवित रहेगी।

3 महीने Ago
देश
₹12 लाख के ग्रांट के साथ ट्राइबल स्टार्टअप्स को उड़ान देने की तैयारी, आवेदन 15 जून तक

ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2026: जनजातीय उद्यमिता को मिलेगा नया मंच भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय अब देश की जनजातीय प्रतिभाओं और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। Startup India के सहयोग से शुरू किया गया “Tribal Business Conclave 2026 – Open Grand Challenge” देशभर के innovators और startups को tribal communities की समस्याओं के समाधान के लिए आमंत्रित कर रहा है। इस initiative का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के लिए practical और technology-based solutions तैयार करना है। सरकार का मानना है कि innovation और entrepreneurship के माध्यम से tribal economy को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। हेल्थ, एजुकेशन और आजीविका पर रहेगा फोकस इस grand challenge को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: Tribal healthcare services को बेहतर बनाना Tribal students के लिए education और skill development solutions तैयार करना Tribal artisans, farmers और entrepreneurs की income बढ़ाने के लिए livelihood innovations विकसित करना सरकार विशेष रूप से ऐसे startups की तलाश में है जो remote tribal क्षेत्रों में scalable और sustainable मॉडल तैयार कर सकें। विजेताओं को मिलेंगे लाखों रुपये इस प्रतियोगिता में चयनित startups को कुल ₹12 लाख तक की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम पुरस्कार – ₹5 लाख द्वितीय पुरस्कार – ₹4 लाख तृतीय पुरस्कार – ₹3 लाख इसके अलावा mentorship, investor connect और national-level exposure जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू Challenge के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक startups Startup India portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। Tribal Economy को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार यह conclave “Vocal for Local” और “Atmanirbhar Bharat” अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे tribal products, handicrafts और local innovations को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। युवाओं के लिए बड़ा अवसर यह challenge विशेष रूप से उन युवाओं और startups के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है जो social impact और rural innovation के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस initiative से tribal communities के जीवन स्तर में सुधार आएगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

Suraj मई 26, 2026 0
Odisha: पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में बड़ा इजाफा!

Odisha: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोमवार को राज्य के सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातकोत्तर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में भारी वृद्धि की घोषणा की। स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों के वजीफे में 55 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले उनका मासिक वजीफा 31,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 48,000 रुपये हो गया है। द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए यह 32,000 रुपये से बढ़कर 52,000 रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह 62 प्रतिशत की वृद्धि है।   तीसरे वर्ष के PG छात्रों और हाउस सर्जनों के वजीफे में भी बड़ा इजाफा   तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए वजीफा 33,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जो 67 प्रतिशत की वृद्धि है।   मुख्यमंत्री ने बताया कि नया वजीफा 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।   सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के हाउस सर्जनों का वजीफा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह वृद्धि इस वर्ष 1 अगस्त से प्रभावी होगी।   वजीफे में वृद्धि को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि अब छात्र शिक्षा और रोगी देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेंगे।

सीबीएसई: स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रति बढ़ाई जाएगी जागरूकता

Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध स्कूलों में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सोशल मीडिया अभियान चलाएगा। इस पर 30 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड ने एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राशि सामग्री निर्माण, प्रचार-प्रसार, डिजिटल विज्ञापन और अभियान प्रबंधन सहित सभी संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी। सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप व्यावसायिक-कौशल शिक्षा अनिवार्य किया है।इसके तहत कौशल शिक्षा और कौशल बोध गतिविधि पुस्तिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऑडियो-विजुअल सामग्री, लघु वीडियो, प्रशंसा पत्र, एनिमेशन तथा विभिन्न डिजिटल क्रिएटिव विकसित किए जाएंगे। बोर्ड की वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद इसे स्वीकृति देने की सिफारिश की। इसके पश्चात प्रबंध समिति ने वित्त समिति की सिफारिशों का अनुमोदन करते हुए एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी।  

PREMSHILA HANSDAH:पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन, संताली सिनेमा जगत में शोक की लहर

PREMSHILA HANSDAH: संताली फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन हो गया है। उनके चले जाने से न केवल संताली सिनेमा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रेमशिला हांसदा अपनी मधुर और जादुई आवाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने कई लोकप्रिय संताली एलबमों और फिल्मों में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। अपनी अद्वितीय कला के दम पर उन्होंने झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य आदिवासी बहुल राज्यों में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। इतनी कम उम्र में उनके निधन ने प्रशंसकों और साथी कलाकारों को झकझोर कर रख दिया है।   सिने जगत के कलाकारों और उनके चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर और 'मरांगबुरू से प्रार्थना की है कि उनकी पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दें। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रेमशिला का जाना संताली संगीत के एक सुनहरे युग की अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले समय में नामुमकिन होगी। उनकी आवाज हमेशा उनके गीतों के माध्यम से जीवित रहेगी।

JAMSHEDPUR: बारीडीह निवासी शंकर सोरेन 45 सालों से जला रहे मातृभाषा संताली की मशाल

JAMSHEDPUR: आज के इस हाई-टेक और एआई के दौर में जहां दुनिया की कई भाषाएं लुप्त हो रही हैं, वहीं जमशेदपुर का एक 76 वर्षीय बुजुर्ग 45 सालों से अपनी मातृभाषा की मशाल जलाए हुए है. हम बात कर रहे हैं बारीडीह माझी टोला निवासी शंकर सोरेन की. जो लोग उम्र को महज एक आंकड़ा मानते हैं, उनके लिए शंकर सोरेन एक जीवंत मिसाल हैं. 76 साल की उम्र में भी उनका अनुशासन और जज्बा किसी 25 साल के ऊर्जावान युवक जैसा है. शंकर सोरेन की दिनचर्या आज भी किसी मिशनरी की तरह है. वे सुबह एक ठोस वर्क प्लान के साथ जागते हैं और रात को सोने से पहले अगले दिन की कार्ययोजना पूरी करके ही चैन की सांस लेते हैं. उनके शब्दकोश में आराम शब्द के लिए कोई जगह नहीं है. वे मानते हैं कि जब तक शरीर में प्राण हैं, तब तक अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए काम करना ही जीवन है. शंकर सोरेन बड़े गर्व से कहते हैं कि मातृभाषा मां के दूध के समान है. यह उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने के योग्य बनाती है. अपनी पहचान बचानी है, तो अपनी भाषा को बचाना ही होगा.   लोगों से 2-2 रुपये चंदे लेकर साईकिल से डोर टू डोर करते थे प्रचार-प्रसार शंकर सोरेन बताते हैं कि मातृभाषा संताली के प्रचार-प्रसार के लिए वे लोगों से 2-2 रुपये की सहयोग राशि मांगते थे. इस छोटी सी राशि और बड़े हौसले के दम पर उनकी टीम ने संताली भाषा को पूरे कोल्हान में घर-घर तक पहुंचाया. शंकर सोरेन याद करते हैं कि कैसे वे और उनकी करीब 60 लोगों की टीम साइकिल पर सवार होकर पूरे कोल्हान का दौरा करती थी. घर-घर जाकर लोगों को संताली भाषा और ओलचिकी लिपि के प्रति जागरूक करना उनका मुख्य उद्देश्य था. उसी मुहिम के क्रम में शंकर सोरेन पिछले 10 वर्षों से आसेका झारखंड के महासचिव के रूप में योगदान दे रहे हैं. वे लगातार मातृभाषा संताली को एक नयी ऊंचाई देने का काम कर रहे हैं. वे बताते हैं उनके नेतृत्व में आसेका के बैनर तले हर साल लगभग 5000 लोग संताली भाषा में परीक्षा देते हैं. अब तक 50 हजार से अधिक लोग इस परीक्षा का हिस्सा बन चुके हैं. इस मुहिम की सबसे सुखद तस्वीर यह है कि परीक्षा देने वाले 5000 छात्रों में से लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं होती हैं. जो एक बड़े सामाजिक बदलाव है. क्योंकि यदि एक महिला शिक्षित होती है और अपनी मातृभाषा सीखती है, तो वह पूरी पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ देती है.   पंडित रघुनाथ मुर्मू से मातृभाषा को बचाने की मिली प्रेरणा शंकर सोरेन के इस जुनून के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है. वे बताते हैं कि 1963 में बहरागोड़ा के कुटूसोल गांव में ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू आये थे. उस समय शंकर की उम्र मात्र 12 साल थी. पंडित मुर्मू जिस तरह ब्लैक बोर्ड पर तस्वीरें बनाकर संताली लिपि सिखा रहे थे. उससे वे काफी प्रभावित हुए और आज तक उनके मन पर गहरी छाप है. उसी दिन वे उनके अनुयायी बन गये और यह संकल्प लिया कि जीवन के अंतिम समय तक अपनी मातृभाषा की सेवा करेंगे.   नौकरी के साथ सामाजिक सेवा में बनायी अलग पहचान शंकर सोरेन के सफर की शुरुआत 1972 में हुई, जब महज 22 साल की उम्र में उन्होंने एलआईसी में क्लर्क के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी. बाद में वे एलआईसी ऑफिस जमशेदपुर में डेवलपमेंट ऑफिसर बने और 2010 में सेवानिवृत्त हुए. लेकिन उनकी असली पहचान नौकरी से इतर उनकी सामाजिक सक्रियता रही. 1978 में जब जमशेदपुर के टिनप्लेट के पास सामाजिक व शैक्षणिक संगठन आसेका का कार्यालय बना, तो शंकर सोरेन इसके सबसे सक्रिय सिपाही बनकर उभरे.  

RANCHI: एआई क्रांति जीने, सोचने व काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन

JAMSHEDPUR: इतिहास के पन्नों को पलटें तो हम पाते हैं कि समय-समय पर ऐसी तकनीकें आती रही हैं जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा बदल दी—चाहे वह पहिए का आविष्कार हो, भाप का इंजन हो या इंटरनेट का आगमन। लेकिन आज हम जिस 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के दौर में जी रहे हैं, वह पहले की किसी भी क्रांति से कहीं अधिक तीव्र, व्यापक और प्रभावशाली है। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह जीने, सोचने और काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन है। आज एआई हमारे जीवन के हर हिस्से में प्रवेश कर चुका है, और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति, यानी युवा पीढ़ी, इस बदलाव के प्रति कितनी सजग है?   वर्तमान समय में युवाओं के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे एआई को एक चुनौती के बजाय एक महाशक्ति (Superpower) के रूप में देखें। अक्सर यह भय फैलाया जाता है कि मशीनें इंसान की जगह ले लेंगी, लेकिन कड़वा सच यह है कि एआई आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि वह व्यक्ति आपकी नौकरी ले लेगा जो एआई का बेहतर इस्तेमाल करना जानता है। इसलिए, आज के युवाओं को अपनी ऊर्जा और ध्यान का केंद्र केवल और केवल अपनी शिक्षा और करियर को बनाना चाहिए।   यहाँ शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि स्वयं को 'एआई-सक्षम' (AI-Ready) बनाना है। शिक्षा कभी बेकार नहीं जाती क्योंकि वह मानव मस्तिष्क को परिष्कृत करती है, लेकिन इस नए युग में शिक्षा का स्वरूप भी 'एआई युक्त' होना चाहिए। इसका मतलब है कि युवाओं को अपनी पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ डेटा विश्लेषण, एल्गोरिदम की समझ और डिजिटल साक्षरता को जोड़ना होगा। जब शिक्षा और तकनीक का यह मेल होगा, तभी युवा इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में न केवल टिक पाएंगे, बल्कि नेतृत्व भी कर पाएंगे। यह समय एकाग्रता का है, खुद को भविष्य के अनुकूल ढालने का है और अपनी मेधा को तकनीक के साथ संरेखित (Align) करने का है।   1. आधुनिक युग की मांग: एआई-युक्त शिक्षा आज वह समय बीत गया जब केवल किताबों को रटकर डिग्रियां हासिल करना काफी होता था। वर्तमान समय की मांग 'स्मार्ट लर्निंग' है। युवाओं को अपनी पारंपरिक शिक्षा में एआई को एक दुश्मन की तरह नहीं, बल्कि एक सहयोगी (Collaborator) की तरह शामिल करना चाहिए। एआई-युक्त शिक्षा का अर्थ है—जटिल विषयों को समझने के लिए डेटा का उपयोग करना, अपनी कमियों को पहचानने के लिए एआई टूल्स की मदद लेना और अपनी रचनात्मकता (Creativity) को तकनीक के साथ जोड़ना।   2. क्यों बेकार नहीं जाती शिक्षा? कहा जाता है कि "शिक्षा वह धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।" एआई के दौर में भी यह बात पूरी तरह सत्य है। एआई केवल वही कर सकता है जो उसे सिखाया गया है, लेकिन आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) केवल एक शिक्षित मानव मस्तिष्क ही कर सकता है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वह संस्कार और समझ है जो हमें मशीन से अलग बनाती है। आपकी पढ़ी हुई हर बात एआई को बेहतर निर्देश देने (Prompt Engineering) में काम आती है।   3. करियर के लिए एकाग्रता का महत्व आज के युवाओं के लिए भटकाव के साधन बहुत हैं, लेकिन करियर पर ध्यान केंद्रित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एआई हर उस काम को कर देगा जो दोहराव वाला (Repetitive) है। इसलिए, युवाओं को अपना ध्यान उन क्षेत्रों में लगाना चाहिए जहाँ भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और रणनीतिक निर्णय की आवश्यकता होती है। जब आपका आधार मज़बूत होगा और आप अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहेंगे, तभी आप भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे।   4. कौशल विकास (Skill Development) ही असली कुंजी है एआई के दौर में करियर बनाने के लिए युवाओं को तीन स्तरों पर काम करना होगा: अपस्किलिंग (Upskilling): अपने वर्तमान क्षेत्र में एआई टूल्स का उपयोग सीखें। री-स्किलिंग (Reskilling): भविष्य की बदलती जरूरतों के अनुसार नए हुनर सीखें। तकनीकी साक्षरता: कोडिंग न भी आए, तो भी एआई कैसे काम करता है, इसकी बुनियादी समझ होना अनिवार्य है।

News stories

Recommended posts

Follow us

Trending

ठंड बढ़ने से झारखंड में मौसम हुआ सर्द

झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।   राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों।   मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।

नवम्बर 27, 2025

देश
स्वास्थ्य
शिक्षा
खेल
मनोरंजन
टेक्नोलॉजी
बिज़नेस
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय समाचार
राज्य समाचार
राष्ट्रीय समाचार