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टाटा स्टील ने डीजीएमएस के तत्वावधान में वूमेन इन माइनिंग कॉन्क्लेव की मेजबानी की

Khoboriya दिसम्बर 8, 2025 0

रांची: टाटा स्टील लिमिटेड ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के तत्वावधान में ‘आज में बदलाव, कल की नई परिभाषा’ थीम पर आधारित ‘वूमन इन माइनिंग’ कॉन्क्लेव का आयोजन चाणक्य बीएनआर, गोसाईंटोला रांची में किया। इस कार्यक्रम में नियामक प्राधिकरणों, खनन क्षेत्र के दिग्गजों और महिला खनन पेशेवरों ने भाग लिया, ताकि खनन उद्योग में बढ़ती महिला भागीदारी और इसके बदलते परिदृश्य पर विचार-विमर्श किया जा सके। यह सम्मेलन हाल ही में हुए श्रम कानून सुधारों के बाद एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तों की संहिता’ के तहत अब महिलाओं को भूमिगत और ओपनकास्ट माइंस में काम करने की अनुमति मिल गई है। यह सुधार देशभर की खनन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है और इससे लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को परिचालन भूमिकाओं में शामिल करने के प्रयास तेज हुए हैं। दिनभर चले इस कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण और नेटवर्किंग से हुई, जिसके बाद औपचारिक उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ। इस अवसर पर डीजीएमएस, टाटा स्टील और खनन उद्योग के प्रमुख गणमान्य वक्ताओं ने संबोधित किया। 

 

महिला पेशेवरों ने अनुभवसफलता की कहानी को साझा किया

उद्योग जगत की प्रस्तुतियों में टाटा स्टील, एलएंडटी, कोल इंडिया, हिंदुस्तान जिंक, एनटीपीसी, सिंगरेनी कोलियरीज, लॉयड्स मेटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। महिला पेशेवरों ने भी अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा की। इस अवसर पर एक विशेष सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ, जिसमें महिला टीमों और प्रस्तुतकर्ताओं को उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

टाटा स्टील, एचजेडएल, एससीसीएल और डीजीएमएस की वरिष्ठ महिला नेतृत्वकर्ताओं द्वारा संचालित पैनल चर्चा का केंद्र बिंदु लैंगिक विविधता को मजबूत करने, महिलाओं में नेतृत्व को बढ़ावा देने, कर्मचारी प्रतिधारण सुधारने तथा समावेशी और सुरक्षित कार्यस्थल विकसित करने की रणनीतियां रहीं।

 

सम्मेलन में उभरते विषयों पर चर्चा किया

सम्मेलन में कई समकालीन और उभरते विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें लैंगिक रूप से समावेशी खनन नीतियां, खनन में महिलाओं की नेतृत्व भूमिकाएं, भविष्य के कार्यबल के लिए पुनः कौशल विकास, सुरक्षित और समावेशी कार्यस्थल, परिधीय एवं संबद्ध भूमिकाओं में महिलाएँ, जनजातीय और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी, बहु-हितधारक साझेदारियाँ, तथा युवा महिलाओं द्वारा रूढ़िवादिता तोड़कर खनन में करियर चुनने जैसे विषय शामिल थे। लीडर्स ने जोर देकर कहा कि खनन क्षेत्र में अधिक महिलाओं और विविध लैंगिक समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक सक्षम, सुरक्षित और प्रोत्साहनकारी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण अनिवार्य है। टाटा स्टील ने भी समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य-उन्मुख खनन संचालन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 

सम्मेलन का समापन एक खुले सत्र और समापन संबोधन के साथ हुआ, जिसमें नियामकों, उद्योग और समुदाय के हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि लैंगिक रूप से समावेशी खनन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। यह आयोजन महिलाओं को सशक्त बनाकर, समानता को बढ़ावा देकर और सभी स्तरों पर नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए खनन के भविष्य को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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ठंड बढ़ने से झारखंड में मौसम हुआ सर्द

झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।   राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों।   मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।

“जंगल का तोहफा”: झारखंड की पारंपरिक औषधीय धरोहर

Adivasi food: झारखंड के रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में पाई जाने वाली यह परंपरा संथाल, हो, ओरांव और मुंडा जैसे आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी जीवनशैली का अहम हिस्सा रही है। जंगलों से गहरा रिश्ता रखने वाले ये समुदाय प्राकृतिक संसाधनों को भोजन और औषधि के रूप में उपयोग करते आए हैं। सर्दियों के मौसम में यह पारंपरिक खाद्य पदार्थ पारिवारिक भोज का विशेष हिस्सा बन जाता है और इसे प्यार से “जंगल का तोहफा” कहा जाता है। यह सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक भी है। ओडिशा में इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल चुका है, जिससे इसकी विशिष्टता और पारंपरिक महत्व को आधिकारिक मान्यता मिलती है। सेहत का प्राकृतिक कवच: ठंड से लेकर इम्युनिटी तक सर्दियों में इसका सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ठंड व सर्दी-जुकाम से बचाव में सहायक माना जाता है। यह भूख बढ़ाने में भी मदद करती है, जिससे शरीर को भरपूर पोषण मिलता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। इसके नियमित सेवन से हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पारंपरिक घरेलू औषधि के रूप में भी अपनाया जाता है, खासकर बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए। रोगों से लड़ने में सहायक और बढ़ती लोकप्रियता आदिवासी समाज में यह धारणा प्रचलित है कि यह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ कई तरह की बीमारियों में राहत पहुँचा सकता है। कोरोना, मलेरिया, पीलिया, बुखार, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और यहाँ तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में इसे सहायक माना जाता है। परंपरागत विश्वासों के अनुसार, चींटियों के काटने से होने वाले बुखार में भी यह लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, वजन बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में इसकी भूमिका बताई जाती है। आजकल शहरी क्षेत्रों में भी लोग इसे स्वास्थ्यवर्धक सुपरफूड के रूप में अपनाने लगे हैं, जिससे यह ग्रामीण और आदिवासी सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक पहचान बना रहा है।

झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2025 का भव्य आगाज, सांस्कृतिक रंगों संग सिनेमा का जश्न शुरू

FILM FESTIVAL: श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में सोमवार को झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव – 2025 (छठा संस्करण) का शुभारंभ बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। फ़िल्म और कला जगत से जुड़े अनेक गणमान्यों की उपस्थिति ने उद्घाटन समारोह को खास बना दिया। मुख्य अतिथि के रूप में आदित्यपुर नगर निगम की उपनगर आयुक्त परुल सिंह तथा सह मुख्य अतिथि के रूप में श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति सुखदेव महतो ने समारोह की शोभा बढ़ाई। विशिष्ट सम्मानित अतिथियों में डॉ. जे.एन. दास,डॉ ज्योति सिंह, पूरबी घोष, पवन कुमार साव, चंचल भाटिया, नेहा तिवार, ज्योति सेनापति, पूर्व वार्ड पार्षद नीतू शर्मा शामिल रहे।   समारोह की शुरुआत परिचय और स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके बाद सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुत आकर्षक स्वागत नृत्य ने मंच का माहौल जीवंत कर दिया। JNFF के संस्थापक संजय सतपथी और राजू मित्रा ने स्वागत भाषण में महोत्सव की यात्रा, उद्देश्य और झारखंड में फ़िल्म संस्कृति के विस्तार पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। सभी मान्यवरों ने अपने प्रेरक संबोधन से कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊँचाई दी।   मंचीय कार्यक्रम के दौरान लोकप्रिय शॉर्ट फ़िल्म “Silk Coffin” की विशेष स्क्रीनिंग की गई, जिसे दर्शकों ने विशेष प्रशंसा दी। महोत्सव को सफल बनाने में संस्थापकों के साथ-साथ क्रिएटिव डायरेक्टर शिवांगी सिंह,डॉ. शालिनी प्रसाद का रचनात्मक नेतृत्व अत्यंत प्रभावी रहा। झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव 08 से 13 दिसंबर तक आयोजित होगा। 09 से 12 दिसंबर तक विभिन्न श्रेणियों की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 13 दिसंबर को समापन एवं पुरस्कार समारोह (Award Night) XLRI, जमशेदपुर में होगा।

झारखंड आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान व अधिकारों के मुद्दें को लेकर घाटशिला में जुटेंगे

जमशेदपुर: राज्यभर के झारखंड आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर ‘झारखंड आंदोलनकारी सेनानी समन्वय आह्वान’ ने 22 नवंबर को बाबा तिलका माझी क्लब, फुलडुंगरी, घाटशिला में एक बैठक बुलाया गया है. आयोजन समिति के प्रो. श्याम मुर्मू, संतोष सोरेन, आदित्य प्रधान, सुराई बास्के व अजीत तिर्की ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्तमान सामाजिक सुरक्षा नीति सीमित होने के कारण हजारों आंदोलनकारी विशेषकर वे जो जेल नहीं गये थे, पर आंदोलन में उनका सक्रिय भूमिका रहा है. लेकिन वे आज भी पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित है. इस स्थिति में अब एक मजबूत संयुक्त मंच की आवश्यकता महसूस की जा रही है. ताकि आंदोलन मजबूती के साथ अपनी मांगों को सरकार के सामने रख सके. उन्होंने सभी आंदोलनकारियों से अपील किया है कि वे उक्त बैठक में आवश्यक रूप से भाग ले.   ये हैं प्रमुख मांगें -सभी आंदोलनकारियों को समान सामाजिक सुरक्षा एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाये -पेंशन में उचित वृद्धि तथा नियमित भुगतान किया जाये -आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान की जाये -आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दिया जाये -झारखंड आंदोलनकारी संग्रहालय सह स्मारक का निर्माण कराया जाये -झारखंड आंदोलनकारी आयोग का पुनर्गठन किया जाये

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव का हुआ समापन

जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में बुधवार को रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव का समापन हुआ. इस पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन शाम को नागपुरी, संताली और जनजातीय लोकगीतों की गूंज के साथ पूरा मैदान झूम उठा. देश के विभिन्न राज्यों से आये कलाकारों ने अपने लोक संगीत और नृत्य से जनजातीय संस्कृति की विविधता का परिचय कराया. नागपुरी गायक अर्जुन लकड़ा और गायिका गरिमा एक्का ने संवाद अखड़ा मंच को संभाला. जैसे ही अर्जुन लकड़ा संवाद अखड़ा मंच पर पहुंचे, युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गयी. दर्शकों ने उनकी पसंदीदा गीतों की फरमाइश शुरू कर दी. लकड़ा ने अपने ट्रेडिंग गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को जोश से भर दिया. उनका गायकी का अंदाज और स्टेज कवरिंग शैली दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी. इसके बाद संताली गायिका कल्पना हांसदा ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक व मॉडर्न गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया. उनके गीतों की धुन पर युवाओं ने मैदान में समूह बनाकर नृत्य किया. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं ने एक-दूसरे का हाथ थाम लोकनृत्य की लय पर झूमकर ट्राइबल संस्कृति की जीवंत छटा बिखेर दी. जनजातीय संगीत पर मंत्रमुग्ध हुए दर्शक कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और युवा उपस्थित थे. हर गीत, हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही. युवाओं ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर इस सांस्कृतिक माहौल को कैद किया. सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि मेघालय, सिक्किम, नागालैंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आये कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी. संवाद अखड़ा के मंच पर इन कलाकारों ने लोकनृत्य, पुनर्जीवित रिवाजों और जनजातीय संगीत के सुरों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम समापन की यह शाम सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बना. लौहनगरी जमशेदपुर की धरती पर कलाकारों ने एकता और कला के नये रंग भी बिखेरा. स्टॉलों से एक करोड़ से अधिकार का हुआ कारोबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल समेत कला और हस्तशिल्प व पारंपरिक उपचार के स्टॉल्स के कई स्टॉल भी लगाये थे. जहां शहर समेत कोल्हान के विभिन्न जगहों से आये लोगों ने जमकर खरीदारी भी की. टीएसएफ के रिपोर्ट के मुताबिक इसबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में एक करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ है. इससे यह बात साबित होती है कि जनजातीय समाज की वस्तुएं अब ब्रांड बन चुकी हैं. जिसे आदिवासी ही नहीं अन्य समाज व समुदाय के लोग भी खूब पसंद कर रहे हैं. संवाद फेलोशिप के लिए नौ फेलो का किया चयन टाटा स्टील फाउंडेशन ने संवाद फेलोशिप 2025 के लिए 9 फेलो के चयन की भी घोषणा की. इनका चयन 572 आवेदनों में से किया गया, जो 25 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 122 जनजातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. जिनमें विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों से 10 आवेदक शामिल थे. फाउंडेशन ने पिछली कई फेलोशिप परियोजनाओं के पूरा होने का भी जश्न मनाया.

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स्टेट हैंडलूम एक्सपो में पारंपरिक हुनर का अद्भुत संगम, 125 स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

JAMSHEDPUR : बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में झारक्राफ्ट द्वारा आयोजित स्टेट हैंडलूम एक्सपो–2025 में प्रदेशभर के बुनकरों, कारीगरों और हस्तशिल्प इकाइयों ने अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया है। 1 से 14 दिसंबर तक आयोजित इस एक्सपो में विभिन्न हैंडलूम उत्पादों के बीच S.K. Handloom Jharkhand (Stall 125) विशेष आकर्षण बना हुआ है। S.K. Handloom Jharkhand द्वारा प्रदर्शित उत्पाद झारखंड के पारंपरिक बुनाई कौशल और कारीगरों की सूक्ष्म कलात्मकता को दर्शाते हैं। इचाक, हजारीबाग के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए हैंडलूम वस्त्र न केवल स्थानीय विरासत को जीवंत रखते हैं, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती प्रदान करते हैं। विशेष आकर्षण ₹600 से ₹5,000 तक की विस्तृत रेंज में उपलब्ध उत्पाद पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन का सुंदर मिश्रण झारखंडी बुनाई शैली की असल प्रतिबिंबित हस्तकृतियाँ कारीगरों द्वारा तैयार शुद्ध, टिकाऊ और हस्तनिर्मित कपड़े महिलाओं और ग्रामीण कारीगरों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली पहल डिजिटल भुगतान सुविधा से लैस स्टॉल, जिससे खरीदारी और भी आसान स्टॉल 125 पर बड़ी संख्या में आगंतुक पहुँच कर हैंडलूम उत्पादों को सराह रहे हैं। स्थानीय निवासियों और आगंतुकों ने झारखंडी कारीगरी की विशिष्ट सुंदरता और गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे पारंपरिक विरासत को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।झारक्राफ्ट द्वारा बताया गया कि एक्सपो का उद्देश्य कारीगरों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध कराना, उनके उत्पादों का प्रचार करना तथा उपभोक्ताओं को राज्य के समृद्ध हैंडलूम और हस्तशिल्प से जोड़ना है।

Khoboriya दिसम्बर 5, 2025 0
गांव की महिलाओं के साथ डीसी व अन्य

78 महिलाओं को डिजिटल क्यूआर कोड दिया गया

टाटा स्टील के मैंगनीज माइंस को फिक्की अवॉर्ड में गोल्ड से नवाजा गया

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Khoboriya दिसम्बर 8, 2025 0

टाटा स्टील डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स लिमिटेड, कलिंगानगर ने जीता ‘कलिंगा सेफ्टी एक्सीलेंस अवॉर्ड

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