भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय अब देश की जनजातीय प्रतिभाओं और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। Startup India के सहयोग से शुरू किया गया “Tribal Business Conclave 2026 – Open Grand Challenge” देशभर के innovators और startups को tribal communities की समस्याओं के समाधान के लिए आमंत्रित कर रहा है।
इस initiative का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के लिए practical और technology-based solutions तैयार करना है। सरकार का मानना है कि innovation और entrepreneurship के माध्यम से tribal economy को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
इस grand challenge को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
Tribal healthcare services को बेहतर बनाना
Tribal students के लिए education और skill development solutions तैयार करना
Tribal artisans, farmers और entrepreneurs की income बढ़ाने के लिए livelihood innovations विकसित करना
सरकार विशेष रूप से ऐसे startups की तलाश में है जो remote tribal क्षेत्रों में scalable और sustainable मॉडल तैयार कर सकें।
इस प्रतियोगिता में चयनित startups को कुल ₹12 लाख तक की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
प्रथम पुरस्कार – ₹5 लाख
द्वितीय पुरस्कार – ₹4 लाख
तृतीय पुरस्कार – ₹3 लाख
इसके अलावा mentorship, investor connect और national-level exposure जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
Challenge के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक startups Startup India portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह conclave “Vocal for Local” और “Atmanirbhar Bharat” अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे tribal products, handicrafts और local innovations को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
यह challenge विशेष रूप से उन युवाओं और startups के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है जो social impact और rural innovation के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस initiative से tribal communities के जीवन स्तर में सुधार आएगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है। राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों। मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।
Adivasi food: झारखंड के रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में पाई जाने वाली यह परंपरा संथाल, हो, ओरांव और मुंडा जैसे आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी जीवनशैली का अहम हिस्सा रही है। जंगलों से गहरा रिश्ता रखने वाले ये समुदाय प्राकृतिक संसाधनों को भोजन और औषधि के रूप में उपयोग करते आए हैं। सर्दियों के मौसम में यह पारंपरिक खाद्य पदार्थ पारिवारिक भोज का विशेष हिस्सा बन जाता है और इसे प्यार से “जंगल का तोहफा” कहा जाता है। यह सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक भी है। ओडिशा में इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल चुका है, जिससे इसकी विशिष्टता और पारंपरिक महत्व को आधिकारिक मान्यता मिलती है। सेहत का प्राकृतिक कवच: ठंड से लेकर इम्युनिटी तक सर्दियों में इसका सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ठंड व सर्दी-जुकाम से बचाव में सहायक माना जाता है। यह भूख बढ़ाने में भी मदद करती है, जिससे शरीर को भरपूर पोषण मिलता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। इसके नियमित सेवन से हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पारंपरिक घरेलू औषधि के रूप में भी अपनाया जाता है, खासकर बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए। रोगों से लड़ने में सहायक और बढ़ती लोकप्रियता आदिवासी समाज में यह धारणा प्रचलित है कि यह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ कई तरह की बीमारियों में राहत पहुँचा सकता है। कोरोना, मलेरिया, पीलिया, बुखार, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और यहाँ तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में इसे सहायक माना जाता है। परंपरागत विश्वासों के अनुसार, चींटियों के काटने से होने वाले बुखार में भी यह लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, वजन बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में इसकी भूमिका बताई जाती है। आजकल शहरी क्षेत्रों में भी लोग इसे स्वास्थ्यवर्धक सुपरफूड के रूप में अपनाने लगे हैं, जिससे यह ग्रामीण और आदिवासी सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक पहचान बना रहा है।
FILM FESTIVAL: श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में सोमवार को झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव – 2025 (छठा संस्करण) का शुभारंभ बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। फ़िल्म और कला जगत से जुड़े अनेक गणमान्यों की उपस्थिति ने उद्घाटन समारोह को खास बना दिया। मुख्य अतिथि के रूप में आदित्यपुर नगर निगम की उपनगर आयुक्त परुल सिंह तथा सह मुख्य अतिथि के रूप में श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के कुलपति सुखदेव महतो ने समारोह की शोभा बढ़ाई। विशिष्ट सम्मानित अतिथियों में डॉ. जे.एन. दास,डॉ ज्योति सिंह, पूरबी घोष, पवन कुमार साव, चंचल भाटिया, नेहा तिवार, ज्योति सेनापति, पूर्व वार्ड पार्षद नीतू शर्मा शामिल रहे। समारोह की शुरुआत परिचय और स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके बाद सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुत आकर्षक स्वागत नृत्य ने मंच का माहौल जीवंत कर दिया। JNFF के संस्थापक संजय सतपथी और राजू मित्रा ने स्वागत भाषण में महोत्सव की यात्रा, उद्देश्य और झारखंड में फ़िल्म संस्कृति के विस्तार पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। सभी मान्यवरों ने अपने प्रेरक संबोधन से कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊँचाई दी। मंचीय कार्यक्रम के दौरान लोकप्रिय शॉर्ट फ़िल्म “Silk Coffin” की विशेष स्क्रीनिंग की गई, जिसे दर्शकों ने विशेष प्रशंसा दी। महोत्सव को सफल बनाने में संस्थापकों के साथ-साथ क्रिएटिव डायरेक्टर शिवांगी सिंह,डॉ. शालिनी प्रसाद का रचनात्मक नेतृत्व अत्यंत प्रभावी रहा। झारखंड राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव 08 से 13 दिसंबर तक आयोजित होगा। 09 से 12 दिसंबर तक विभिन्न श्रेणियों की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 13 दिसंबर को समापन एवं पुरस्कार समारोह (Award Night) XLRI, जमशेदपुर में होगा।
जमशेदपुर: राज्यभर के झारखंड आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर ‘झारखंड आंदोलनकारी सेनानी समन्वय आह्वान’ ने 22 नवंबर को बाबा तिलका माझी क्लब, फुलडुंगरी, घाटशिला में एक बैठक बुलाया गया है. आयोजन समिति के प्रो. श्याम मुर्मू, संतोष सोरेन, आदित्य प्रधान, सुराई बास्के व अजीत तिर्की ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्तमान सामाजिक सुरक्षा नीति सीमित होने के कारण हजारों आंदोलनकारी विशेषकर वे जो जेल नहीं गये थे, पर आंदोलन में उनका सक्रिय भूमिका रहा है. लेकिन वे आज भी पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित है. इस स्थिति में अब एक मजबूत संयुक्त मंच की आवश्यकता महसूस की जा रही है. ताकि आंदोलन मजबूती के साथ अपनी मांगों को सरकार के सामने रख सके. उन्होंने सभी आंदोलनकारियों से अपील किया है कि वे उक्त बैठक में आवश्यक रूप से भाग ले. ये हैं प्रमुख मांगें -सभी आंदोलनकारियों को समान सामाजिक सुरक्षा एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाये -पेंशन में उचित वृद्धि तथा नियमित भुगतान किया जाये -आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान की जाये -आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दिया जाये -झारखंड आंदोलनकारी संग्रहालय सह स्मारक का निर्माण कराया जाये -झारखंड आंदोलनकारी आयोग का पुनर्गठन किया जाये
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में बुधवार को रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव का समापन हुआ. इस पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन शाम को नागपुरी, संताली और जनजातीय लोकगीतों की गूंज के साथ पूरा मैदान झूम उठा. देश के विभिन्न राज्यों से आये कलाकारों ने अपने लोक संगीत और नृत्य से जनजातीय संस्कृति की विविधता का परिचय कराया. नागपुरी गायक अर्जुन लकड़ा और गायिका गरिमा एक्का ने संवाद अखड़ा मंच को संभाला. जैसे ही अर्जुन लकड़ा संवाद अखड़ा मंच पर पहुंचे, युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गयी. दर्शकों ने उनकी पसंदीदा गीतों की फरमाइश शुरू कर दी. लकड़ा ने अपने ट्रेडिंग गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को जोश से भर दिया. उनका गायकी का अंदाज और स्टेज कवरिंग शैली दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी. इसके बाद संताली गायिका कल्पना हांसदा ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक व मॉडर्न गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया. उनके गीतों की धुन पर युवाओं ने मैदान में समूह बनाकर नृत्य किया. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं ने एक-दूसरे का हाथ थाम लोकनृत्य की लय पर झूमकर ट्राइबल संस्कृति की जीवंत छटा बिखेर दी. जनजातीय संगीत पर मंत्रमुग्ध हुए दर्शक कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और युवा उपस्थित थे. हर गीत, हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही. युवाओं ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर इस सांस्कृतिक माहौल को कैद किया. सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि मेघालय, सिक्किम, नागालैंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आये कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी. संवाद अखड़ा के मंच पर इन कलाकारों ने लोकनृत्य, पुनर्जीवित रिवाजों और जनजातीय संगीत के सुरों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम समापन की यह शाम सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बना. लौहनगरी जमशेदपुर की धरती पर कलाकारों ने एकता और कला के नये रंग भी बिखेरा. स्टॉलों से एक करोड़ से अधिकार का हुआ कारोबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल समेत कला और हस्तशिल्प व पारंपरिक उपचार के स्टॉल्स के कई स्टॉल भी लगाये थे. जहां शहर समेत कोल्हान के विभिन्न जगहों से आये लोगों ने जमकर खरीदारी भी की. टीएसएफ के रिपोर्ट के मुताबिक इसबार संवाद-ए ट्राइबल कॉन्क्लेव में एक करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ है. इससे यह बात साबित होती है कि जनजातीय समाज की वस्तुएं अब ब्रांड बन चुकी हैं. जिसे आदिवासी ही नहीं अन्य समाज व समुदाय के लोग भी खूब पसंद कर रहे हैं. संवाद फेलोशिप के लिए नौ फेलो का किया चयन टाटा स्टील फाउंडेशन ने संवाद फेलोशिप 2025 के लिए 9 फेलो के चयन की भी घोषणा की. इनका चयन 572 आवेदनों में से किया गया, जो 25 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 122 जनजातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. जिनमें विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों से 10 आवेदक शामिल थे. फाउंडेशन ने पिछली कई फेलोशिप परियोजनाओं के पूरा होने का भी जश्न मनाया.
ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2026: जनजातीय उद्यमिता को मिलेगा नया मंच भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय अब देश की जनजातीय प्रतिभाओं और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। Startup India के सहयोग से शुरू किया गया “Tribal Business Conclave 2026 – Open Grand Challenge” देशभर के innovators और startups को tribal communities की समस्याओं के समाधान के लिए आमंत्रित कर रहा है। इस initiative का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के लिए practical और technology-based solutions तैयार करना है। सरकार का मानना है कि innovation और entrepreneurship के माध्यम से tribal economy को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। हेल्थ, एजुकेशन और आजीविका पर रहेगा फोकस इस grand challenge को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: Tribal healthcare services को बेहतर बनाना Tribal students के लिए education और skill development solutions तैयार करना Tribal artisans, farmers और entrepreneurs की income बढ़ाने के लिए livelihood innovations विकसित करना सरकार विशेष रूप से ऐसे startups की तलाश में है जो remote tribal क्षेत्रों में scalable और sustainable मॉडल तैयार कर सकें। विजेताओं को मिलेंगे लाखों रुपये इस प्रतियोगिता में चयनित startups को कुल ₹12 लाख तक की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम पुरस्कार – ₹5 लाख द्वितीय पुरस्कार – ₹4 लाख तृतीय पुरस्कार – ₹3 लाख इसके अलावा mentorship, investor connect और national-level exposure जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू Challenge के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक startups Startup India portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। Tribal Economy को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार यह conclave “Vocal for Local” और “Atmanirbhar Bharat” अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे tribal products, handicrafts और local innovations को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। युवाओं के लिए बड़ा अवसर यह challenge विशेष रूप से उन युवाओं और startups के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है जो social impact और rural innovation के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस initiative से tribal communities के जीवन स्तर में सुधार आएगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
JAMSHEDPUR:बालीगुमा स्थित करम अखड़ा में रविवार को बृहद झारखंड कला-संस्कृति मंच की ओर से डहरे टुसू-2026 की तैयारी को लेकर एक बैठक स्वतंत्रता सेनानी शहीद रघुनाथ महतो के वंशज भूपेन महतो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. भूपेन महतो ने बताया कि इस बार भी डिमना चौक से लेकर साकची आमबागान मैदान तक भव्य डहरे टुसू पर्व शोभायात्रा निकाली जायेगी. इसमें पटमदा, बोड़ाम, मुसाबनी, घाटशिला, चाकुलिया, बहरागोड़ा समेत कोल्हान के विभिन्न गांवों से हजारों की संख्या में डहरे टुसू पर्व में शामिल होंगे. डहरे टुडू पर्व के बहाने कुड़मी समाज के लोग अपनी एकता को प्रदर्शित करेंगे. उन्होंने बताया कि डहरे टुसू पर्व शोभायात्रा में अनूठी झांकी निकाली जायेगी. जो कुड़मी समाज की गौरवमयी इतिहास पर आधारित होगी. शोभायात्रा दल में छऊ नृत्य आकर्षण का केंद्र बनेगा. झांकी में एक हजार नगाड़ा वादक पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे और नगाड़ा की थाप पर शहर वासियों को झूमने के मजबूर कर देंगे. वहीं पीली साड़ी में 2 हजार से अधिक कलाकार डिमना से आमबागान चौक के बीच लाइव परफॉमेंश देंगे. वे नगाड़ा व मांदर के साथ पर नृत्य की प्रस्तुति देंगे. बृहद झारखंड कला-संस्कृति मंच के दीपक रंजीत ने कहा कि डहरे टुसू का आयोजन सुदूर गांव देहातों में होता आ रहा है. लेकिन शहर में इसका आयोजन कर इसकी महत्ता से अन्य समाज व समुदाय को भी अवगत कराया जायेगा. कुड़मी समाज की संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. बैठक में पटमदा, बोडाम, डिमना समेत अन्य जगहों से कुड़मी समाज के कई लोग शामिल हुए.